Wednesday, March 31, 2010

Threads and Processes

First Answer:


The major difference between threads and processes is 
1. Threads share the address space of the process that
created it; processes have their own address.

2. Threads have direct access to the data segment of its
process; processes have their own copy of the data segment
of the parent process.

3. Threads can directly communicate with other threads of
its process; processes must use inter-process communication
to communicate with sibling processes.

4. Threads have almost no overhead; processes have
considerable overhead.

5. New threads are easily created; new processes require
duplication of the parent process.

6. Threads can exercise considerable control over threads of
the same process; processes can only exercise control over
child processes.

7. Changes to the main thread (cancellation, priority
change, etc.) may affect the behavior of the other threads
of the process; changes to the parent process does not
affect child processes.


Second Answer:


process is a execution of a program and program contain set 
of instructions but thread is a single sequence stream
within the process.thread is sometime called lightweight
process. single thread alows a os to perform singler task
ata time


Similarities between process and threads are: 
1)share cpu.
2)sequential execution
3)create child
4)if one thread is blocked then the next will be start to
run like process.


 
Dissimilarities:
1)threads are not independent like process.
2)all threads can access every address in the task unlike
process.
3)threads are design to assist onr another and process
might or not might be assisted on one another.

Sunday, March 28, 2010

How to keep food fresh naturally

 

Food

Wondering why your fruits and veggies lose the freshness in just one day? Well, the problem must be in the way you are storing them. TOI gets you the solution...


1)  Never store apples with any other vegetables or fruits. Apples emit certain gases which make the other good items rot. Similarly, never store tomatoes and cucumber in the same compartment as even tomatoes emit gases which can make the cucumber rot.


2)  Always store items like eggs with the pointed side downward to keep them fresh longer.


3) Store cheese with a few cubes of sugar in an air tight container as the cubes absorb the moisture from the cheese and help it stay fresh for a longer period of time.


4) Keep a potato in your refrigerator. The potato absorbs bad smells from cooked food or even otherwise and also absorbs gases in the fridge, thus helping other things stay fresher. But you must change the potato every few days.


5) Always store radish in a vessel with water to keep it crisp.

Thursday, March 25, 2010

बड़प्पन का अर्थ

एक राज्य में बुद्ध प्रवचन करने पहुंचे। वहां के लोग बेहद प्रसन्न हुए। उन्होंने सोचा कि उन्हें बुद्ध के दर्शन का सौभाग्य मिलेगा। राज्य का मंत्री बहुत ही नेक व ईमानदार था। उसने राजा से कहा, 'महाराज! आपको बुद्ध का स्वागत करने स्वयं जाना चाहिए।' इस पर राजा ने गुस्से से भड़क कर कहा, 'मैं क्यों जाऊं। बुद्ध एक भिक्षु हैं। उन्हें आना होगा तो वह स्वयं महल में मुझसे मिलने आएंगे।'
विद्वान मंत्री को राजा का यह रवैया अच्छा नहीं लगा। उसने उसी समय पद छोड़ने का निर्णय किया। उसने त्यागपत्र में लिखा, 'मैं आपके जैसे छोटे आदमी की अधीनता में काम नहीं कर सकता। आपमें बड़प्पन नहीं है।' राजा ने त्यागपत्र पढ़कर मंत्री को बुलाया और कहा, 'तुमने त्यागपत्र गलतफहमी में लिखा है। मैं बड़प्पन के कारण ही तो बुद्ध के स्वागत के लिए नहीं जा रहा हूं। आखिर मैं इतना बड़ा सम्राट हूं।'


राजा की बात सुनकर मंत्री बोला, 'अकड़ और घमंड बड़प्पन नहीं है। आप शायद भूल रहे हैं कि बुद्ध भी कभी महान सम्राट थे। उन्होंने अध्यात्म की प्राप्ति हेतु और अपने जन्म को सार्थक सिद्ध करने के उद्देश्य से ही स्वेच्छा व प्रसन्नता से राजसी वैभव त्यागकर भिक्षु का पात्र ग्रहण किया है। भिक्षु का पात्र साम्राज्य से कहीं श्रेष्ठ है। आप तो भगवान बुद्ध से बहुत पीछे हैं क्योंकि वह सम्राट होने के बाद भिक्षु बने हैं। सम्राट होने पर भी उनके मन में दया, विनम्रता और करुणा थी। वास्तव में इंसानियत के गुणों से विभूषित मनुष्य ही उच्च अध्यात्म व ज्ञान को प्राप्त कर सकता है। तभी तो बुद्ध अपने कार्य में सफल हो पाए।'
मंत्री की बातें सुनकर राजा का गर्व चूर-चूर हो गया और वह उसी समय मंत्री के साथ भगवान बुद्ध का स्वागत करने के लिए गया और उसने उनके चरणों में गिरकर उनसे दीक्षा देने का अनुरोध किया। बुद्ध ने राजा को सहर्ष गले लगाकर उसे दीक्षा देना स्वीकार कर लिया।

: रेनू सैनी

योगी से पहले उपयोगी बनो

आज के इस दौड़ते-भागते जीवन में हम शब्दों का प्रयोग तो करते हैं, लेकिन उसके भीतर छुपे ज्ञान को

नजरअंदाज़ कर देते हैं। किसी भी भाषा में कोई भी शब्द यदि विद्यमान है तो उसके पीछे कोई न कोई दर्शन अवश्य होगा। जैसे हम सबको 'व्यक्ति' कहा जाता है; जिसका अर्थ है -वह जो व्यक्त है। अब से कुछ समय पहले तक हम अव्यक्त थे, कुछ समय बाद हम पुन: अव्यक्त हो जाएंगे। लेकिन अभी इस संसार में हम व्यक्त है।
इसी प्रकार किसी भी भाषा में जो भी शब्द हैं - चाहे वे संस्कृत से हों या लैटिन से, उन सब शब्दों का विकास किसी अवधारणा के आधार पर होता है। बात शब्दों के भंवर में फंसने की नहीं है, बल्कि उन शब्दों के माध्यम से इस संसार भंवर से पार लगने की है। आज हम जिस शब्द की बात करने जा रहे हैं, वह शब्द है योगी।
अक्सर देखा गया है कि मंत्री पहले उपमंत्री बनता है, आयुक्त से पहले उपायुक्त बनता है। इस तरह हमारा उत्तरोत्तर विकास होता है। तो विचार करें कि योगी बनने से पहले योगी क्या बनता है? भारत योगियों का देश है। उन्हें भगवान स्वरूप माना जाता है। कृष्ण को भी योगी राज कहा जाता है। लेकिन कृष्ण कहते हैं कि पहले लोक कल्याण के लिए कर्म करो। पहले समाज के लिए उपयोगी बनो, फिर योगी बनो।
इस संसार में चार तरह की वृत्तियां हैं- खनिज, वनस्पति, पशु और मनुष्य। इन सबकी परिधि अर्थात् सीमा तय है। खनिज वस्तुएं बिना बाहरी सहयोग के एक जगह से दूसरी जगह नहीं जा सकतीं। वनस्पतियों में जन्म, मृत्यु और जरा जैसी गतियां हैं, परंतु वे पशु जगत की तुलना में नगण्य हैं। पशु जगत का आधार अधिक व्यापक है, परंतु मनुष्य की परिधि असीमित है।
इस विचार को आगे बढ़ाते हुए अगर हम अपने आसपास नजर दौड़ाएं तो पाएंगे कि मनुष्य खुद भी कुछ हद तक इन्हीं विभागों में बंटा हुआ है। कुछ लोग पूर्णत: स्वार्थमय जीवन जीते हैं। उनके लिए स्वयं का सुख सर्वोपरि है। घर, परिवार, समाज का विचार भी उनके मस्तिष्क में नहीं आता। आता है तो केवल अपने शरीर का सुख। इस तरह के मनुष्य को हम खनिज मानव कह सकते हैं।

 
इसके बाद परिवार में आसक्त व्यक्ति की बात करते हैं। वह भी मूलत: स्वार्थी है। परंतु उसने अपने जीवन की परिधि अपने से बढ़ा कर परिवार तक कर दी है। वह परिवार या बच्चों के लिए कोई त्याग करने का विचार पाल लेता है। ऐसा व्यक्ति परिवार के लिए उपयोगी होता है और उसे हम वनस्पति मानव की संज्ञा दे सकते हैं।
कोई व्यक्ति जब अपनी परिधि को और विस्तार देता है तो निजी स्वार्थ को त्याग कर अपने समाज या देश के लिए सोचता है। वह समाज व देश के लिए उपयोगी बनता है। ऐसा व्यक्ति पूरे समाज के उत्थान के लिए कार्य करता है। और अंत में आता है संपूर्ण पुरुष, जो समाज और देश की सीमाओं से भी ऊपर उठ कर पूरी मानवता के विषय में सोचता है। इसी तरह के व्यक्ति के लिए कहा गया है -
कबीरा खड़ा बजार में, मांगे सबकी खैर।
ना काहू से दोस्ती, ना काहू से बैर।।
आज हम समाज में योगी तो बहुत देखते हैं, परंतु क्या वे समाज के लिए उपयोगी हैं? संन्यास लेने का अर्थ यह भी नहीं है कि संन्यास लेकर जंगल चले जाएं। संन्यास एक मान्य प्रथा है, लेकिन हममें से कितने लोग इसके अधिकारी हैं? यदि अपने सांसारिक कर्त्तव्य हम पूरी दक्षता से तथा आसक्ति रहित होकर करें, तभी हम संन्यासी तथा योगी बनने के अधिकारी हैं। इसलिए योगी से पहले उपयोगी बनें।

:-आचार्य शिवेन्द्र नागर

Wednesday, March 24, 2010

खराब दोस्त जानवर से भी बदतर है

महात्मा बुद्ध का जन्म 563 ई.पू. लुंबिनी (नेपाल) के राजपरिवार में हुआ। उनका बचपन का नाम सिद्धार्थ था। बचपन में ही किसी संत ने भविष्यवाणी कर दी थी कि सिद्धार्थ तमाम सुख-सुविधाओं का त्याग कर सादगीपूर्ण जिंदगी बिताएंगे, लेकिन उनके पिताजी ऐसा नहीं चाहते थे। उन्होंने सिद्धार्थ के महल से बाहर निकलने पर पाबंदी लगा दी।

बड़े होने पर जब पहली बार सिद्धार्थ महल से निकले तो उन्होंने जिंदगी का दुख, तकलीफ और पीड़ा महसूस की। हालांकि तब तक उनकी शादी एक खूबसूरत राजकुमारी यशोधरा से हो चुकी थी और उनका राहुल नाम का बेटा भी था। फिर भी 30 साल की उम्र में महल छोड़ वह ज्ञान की खोज में निकल पड़े। कुछ बरस के बाद बिहार के बोधगया में उन्हें ज्ञान की प्राप्ति हुई और वह इस नतीजे पर पहुंचे कि सच हर किसी के अंदर है, बाहर उसकी तलाश बेकार है। 80 साल की उम्र में 483 ई.पू. उन्होंने देह का त्याग कर दिया। उनकी कही कुछ बातें...

- दुनिया में दुख है। दुखों की कोई-न-कोई वजह है। दुखों का निवारण मुमकिन है।

- दुखों की मूल वजह अज्ञान है। अज्ञान के कारण ही इंसान मोह-माया और तृष्णा में फंसा रहता है।

- अज्ञान से छुटकारा पाने के लिए अष्टांग मार्ग का पालन है : 1. सही समझ, 2. सही विचार, 3. सही वाणी, 4. सही कार्य, 5. सही आजीविका, 6. सही प्रयास, 7. सही सजगता और 8. सही एकाग्रता।

- साधना के जरिए सर्वोच्च सिद्ध अवस्था को पाया जा सकता है। यही अवस्था बुद्ध कहलाती है और इसे कोई भी पा सकता है।

- इस ब्रह्मांड को चलानेवाला कोई नहीं है और न ही कोई बनानेवाला है।

- न तो ईश्वर है और न ही आत्मा। जिसे लोग आत्मा समझते हैं, वह चेतना का प्रवाह है। यह प्रवाह कभी भी रुक सकता है।

- भगवान और भाग्यवाद कोरी कल्पना है, जो हमें जिंदगी की सचाई और असलियत से अलग कर दूसरे पर निर्भर बनाती है।

- पांचों इंद्रियों की मदद से जो ज्ञान मिलता है, उसे आत्मा मान लिया जाता है। असल में बुद्धि ही जानती है कि क्या है और क्या नहीं। बुद्धि का होना ही सत्य है। बुद्धि से ही यह समस्त संसार प्रकाशवान है।

- मरने के बाद चेतना महा सुषुप्ति में सो जाती है। वह लंबे समय तक ऐसे ही पड़ी रह सकती है या फौरन ही दूसरा जन्म लेकर संसार के चक्र में फिर से शरीक हो सकती है।

- न यज्ञ से कुछ होता है और न ही धार्मिक किताबों को पढ़ने मात्र से। धर्म की किताबों को गलती से परे मानना नासमझी है। पूजा-पाठ से पाप नहीं धुलते।

- जैसा मैं हूं, वैसे ही दूसरा प्राणी है। जैसे दूसरा प्राणी है, वैसा ही मैं हूं इसलिए न किसी को मारो, न मारने की इजाजत दो।

- किसी बात को इसलिए मत मानो कि दूसरों ने ऐसा कहा है या यह रीति-रिवाज है या बुजुर्ग ऐसा कहते हैं या ऐसा किसी धर्म प्रचारक का उपदेश है। मानो उसी बात को, जो कसौटी पर खरी उतरे। कोई परंपरा या रीति-रिवाज अगर मानव कल्याण के खिलाफ है तो उसे मत मानो।

- खुद को जाने बगैर आत्मवान नहीं हुआ जा सकता। निर्वाण की हालत में ही खुद को जाना जा सकता है।

- इस ब्रह्मांड में सब कुछ क्षणिक और नश्वर है। कुछ भी स्थायी नहीं। सब कुछ लगातार बदलता रहता है।

- एक धूर्त और खराब दोस्त जंगली जानवर से भी बदतर है, क्योंकि जानवर आपके शरीर को जख्मी करेगा, जबकि खराब दोस्त दिमाग को जख्मी करेगा।

- आप चाहे कितने ही पवित्र और अच्छे शब्द पढ़ लें या बोल लें, लेकिन अगर उन पर अमल न करें, तो कोई फायदा नहीं।

- सेहत सबसे बड़ा तोहफा है, संतुष्टि सबसे बड़ी दौलत और वफादारी सबसे अच्छा रिश्ता है।

- अमीर और गरीब, दोनों से एक जैसी सहानुभूति रखो क्योंकि हर किसी के पास अपने हिस्से का दुख और तकलीफ है। बस किसी के हिस्से ज्यादा तकलीफ आती है, तो किसी के कम।

- हजारों लड़ाइयां जीतने से बेहतर खुद पर जीत हासिल करना है। आपकी इस जीत को न देवता छीन सकते हैं, न दानव, न स्वर्ग मिटा सकता है, न नरक।

- इंसान को गलत रास्ते पर ले जानेवाला उसका अपना दिमाग होता है, न कि उसके दुश्मन।

- शक से बुरी आदत कोई नहीं होती। यह लोगों के दिलों में दरार डाल देती है। यह ऐसा जहर है, जो रिश्तों को कड़वा कर देता है। ऐसा कांटा है, जो घाव और तकलीफ देता है। यह ऐसी तलवार है, जो मार डालती है।

- गुस्से के लिए आपको सजा नहीं दी जाएगी, बल्कि खुद गुस्सा आपको सजा देगा।

Tuesday, March 23, 2010

RTI: सूचना का अधिकार

आरटीआई(Right To Information) 

यानी करप्शन की काट आपके हाथ

2005 में आम नागरिकों को ऐसा हथियार मिला, जिसकी हमें काफी जरूरत थी। राइट टु इन्फर्मेशन ऐक्ट के लागू हो जाने से आम जनता को हर वो चीज जानने का अधिकार मिल गया है, जिसका संबंध उसकी जिंदगी से है। सरकारी विभागों से करप्शन का सफाया करने का भी यह अचूक हथियार है। हालांकि लोग अब भी इसके इस्तेमाल और अहमियत के बारे में ज्यादा नहीं जानते। हमारे कई रीडर्स ने हमसे कहा था कि कॉलम के जरिए आरटीआई ऐक्ट के बारे में बताएं। great-self-improvement-strategies_esm
'सूचना का अधिकार' अधिनियम 2005 भारतीय नागरिकों को संसद सदस्यों और राज्य विधानमंडल के सदस्यों के बराबर सूचना का अधिकार देता है। इस अधिनियम के अनुसार, ऐसी इन्फर्मेशन जिसे संसद या विधानमंडल सदस्यों को देने से इनकार नहीं किया जा सकता, उसे किसी आम व्यक्ति को देने से भी इनकार नहीं किया जा सकता। इसलिए अब अगर आपके स्कूल के टीचर हमेशा गैर-हाजिर रहते हों, आपके आसपास की सड़कें खराब हालत में हों, सरकारी अस्पतालों में मशीन खराब होने के नाम पर जांच न हो, हेल्थ सेंटरों में डॉक्टर या दवाइयां न हों, अधिकारी काम के नाम पर रिश्वत मांगें या फिर राशन की दुकान पर राशन ही न मिले तो आप सूचना के अधिकार यानी आरटीआई के तहत ऐसी सूचनाएं पा सकते हैं। यह अधिकार आपको और ताकतवर बनाता है।

 
क्या है आरटीआई
सरकारी कार्यप्रणाली में खुलापन और पारदर्शिता लाने के लिए सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 लाया गया है। यह लोकतांत्रिक संस्थानों को मजबूत बनाने, करप्शन हटाने, जनता को अधिकारों से लैस बनाने और राष्ट्र के विकास में नागरिकों की भागीदारी बढ़ाने में मील का पत्थर साबित हुआ है।


अधिकार
- हर पब्लिक अथॉरिटी में एक या अधिक अधिकारियों को जन सूचना अधिकारी के रूप में अपॉइंट करना जरूरी है। आम नागरिकों द्वारा मांगी गई सूचना को समय पर उपलब्ध कराना इन अधिकारियों की जिम्मेदारी होती है।
- इस अधिनियम में राइट टु इन्फर्मेशन सिर्फ भारतीय नागरिकों को ही मिला है। इसमें निगम, यूनियन, कंपनी वगैरह को सूचना देने का प्रावधान नहीं है, क्योंकि ये नागरिकों की परिभाषा में नहीं आते।
- अगर किसी निगम, यूनियन, कंपनी या एनजीओ का कर्मचारी या अधिकारी आरटीआई दाखिल करता है तो उसे सूचना दी जाएगी, बशर्ते उसने सूचना अपने नाम से मांगी हो, निगम या यूनियन के नाम पर नहीं।


कैसी इन्फर्मेशन
- जनता को किसी पब्लिक अथॉरिटी से ऐसी इन्फर्मेशन मांगने का अधिकार है जो उस अथॉरिटी के पास उपलब्ध है या उसके नियंत्रण में है। इस अधिकार में उस अथॉरिटी के पास या नियंत्रण में मौजूद कृति, दस्तावेज या रेकॉर्ड, रेकॉर्डों या दस्तावेजों के नोट्स, प्रमाणित कॉपी और दस्तावेजों के सर्टिफाइड नमूने लेना शामिल है।
- नागरिकों को डिस्क, फ्लॉपी, टेप, विडियो कैसेट या किसी और इलेक्ट्रॉनिक या प्रिंटआउट के रूप में सूचना मांगने का अधिकार है। शर्त यह है कि मांगी गई सूचना उसमें पहले से मौजूद हो।
- आवेदक को सूचना आम तौर पर उसी रूप में मिलनी चाहिए जिसमें वह मांगता है। अगर कोई विशेष सूचना दिए जाने से पब्लिक अथॉरिटी के संसाधनों का गलत इस्तेमाल होने की आशंका हो या इससे रेकॉर्डों के परीक्षण में किसी नुकसान की आशंका होती है तो सूचना देने से मना किया जा सकता है।


सिविक एजेंसियों को बनाएं जवाबदेह
- अक्सर यह देखने में आता है कि तमाम सिविक एजेंसियां जैसे डीडीए, एमसीडी, एनडीएमसी, ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट से जनता को ढेरों शिकायतें रहती हैं कि उनके लेटर पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। ऐसे में आप अपनी शिकायत के कुछ समय बाद सूचना के अधिकार के तहत संबंधित विभाग से अपने लेटर पर हुई कार्रवाई की सिलसिलेवार जानकारी ले सकते हैं।
- आप किसी भी पब्लिक अथॉरिटी जैसे केंद्र या राज्य सरकार के विभागों, पंचायती राज संस्थाओं, न्यायालयों, संसद, राज्य विधायिका और दूसरे संगठनों, गैरसरकारी संगठनों सहित ऐसे सभी विभाग जो प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से राज्य अथवा केंद्र सरकार द्वारा स्थापित संघटित, अधिकृत, नियंत्रित अथवा पर्याप्त रूप से वित्तपोषित हैं, से जानकारियां मांग सकते हैं।
- आप किसी प्राइवेट स्कूल, टेलिफोन कंपनी या बिजली कंपनी आदि से जुड़ी जानकारी पाने के लिए संबंधित विभाग से सूचना के अधिकार के तहत ऐप्लिकेशन दे सकते हैं।


कैसे भरें आरटीआई
- सूचना पाने के लिए कोई तय प्रोफार्मा नहीं है। सादे कागज पर हाथ से लिखकर या टाइप कराकर 10 रुपये की फिक्स्ड फीस के साथ अपनी ऐप्लिकेशन संबंधित अधिकारी के पास किसी भी रूप में (खुद या डाक द्वारा) जमा कर सकते हैं। किसी खास तरह से आवेदन करने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता है।
- आप हिंदी, अंग्रेजी या किसी भी स्थानीय भाषा में ऐप्लिकेशन दे सकते हैं।
- ऐप्लिकेशन फीस नकद, डिमांड ड्राफ्ट या पोस्टल ऑर्डर से दी जा सकती है।
- डिमांड ड्राफ्ट या पोस्टल ऑर्डर संबंधित विभाग (पब्लिक अथॉरिटी) के अकाउंट ऑफिसर के नाम पर होना चाहिए।
- डिमांड ड्राफ्ट के पीछे और पोस्टल ऑर्डर में दी गई जगह पर अपना नाम और पता जरूर लिखें।
- आरटीआई ऐक्ट जम्मू और कश्मीर के अलावा पूरे देश में लागू है।
- अगर आप फीस नकद जमा कर रहे हैं तो रसीद जरूर ले लें।
- गरीबी रेखा के नीचे की कैटिगरी में आने वाले ऐप्लिकेंट को किसी भी तरह की फीस देने की जरूरत नहीं है। इसके लिए उसे अपना बीपीएल सर्टिफिकेट दिखाना होगा।
- सिर्फ जन सूचना अधिकारी को ऐप्लिकेशन भेजते समय ही फीस देनी होती है। पहली अपील या सेंट्रल इन्फर्मेशन कमिश्नर को दूसरी अपील के लिए किसी प्रकार की फीस नहीं देनी होती।
- अगर सूचना अधिकारी आपको समय पर सूचना उपलब्ध नहीं करा पाता है और आपसे तीन दिन की समयसीमा गुजरने के बाद डॉक्युमेंट उपलब्ध कराने के नाम पर अतिरिक्त धनराशि जमा कराने के लिए कहता है तो यह गलत है। इस स्थिति में अधिकारी आपको मुफ्त डॉक्युमेंट उपलब्ध कराएगा। चाहे उनकी संख्या कितनी भी हो।
- एप्लिकेंट को सूचना मांगने के लिए कोई वजह या पर्सनल ब्यौरा देने की जरूरत नहीं है। उसे सिर्फ अपना पता देना होगा।
पोस्टल डिपार्टमेंट की जिम्मेदारी
केंद्र सरकार के सभी विभागों के लिए 629 पोस्ट ऑफिसों को सहायक जन सूचना कार्यालय बनाया गया है। इसका मतलब यह है कि आप इनमें से किसी भी पोस्ट ऑफिस में जाकर इनके आरटीआई काउंटर पर फीस और ऐप्लिकेशन जमा कर सकते हैं। वे आपको रसीद और अकनॉलेजमेंट (पावती पत्र) देंगे। यह पोस्ट ऑफिस की जिम्मेदारी है कि वह आपकी ऐप्लिकेशन संबंधित सूचना अधिकारी तक पहुंचाए। पोस्ट ऑफिसों की लिस्ट  www.indiapost.gov.in पर उपलब्ध हैं।

 
इन बातों का रखें ध्यान
- आप जब भी आरटीआई के तहत जानकारी मांगें तो हमेशा संभावित जवाबों को ध्यान में रखकर अपने सवाल तैयार करें। आपका जोर ज्यादा से ज्यादा सूचना प्राप्त करने पर होना चाहिए।
- अगर अपने आवेदन में कुछ दस्तावेजों की मांग कर रहे हैं तो संभावित शुल्क पहले ही ऐप्लिकेशन शुल्क के साथ जमा कर दें। जैसे आपने चार से पांच डॉक्युमेंट मांगे हैं तो आप 10 रुपये के बजाय 20 रुपये का पोस्टल ऑर्डर, ड्राफ्ट या नकद जमा कर सकते हैं। ऐसे में सूचना अधिकारी द्वारा आपसे अतिरिक्त धनराशि मांगने और आपके द्वारा उसे जमा किए जाने में बीत रहे समय को बचाया जा सकता है।
- पोस्टल ऑर्डर में पूरी जानकारी भरकर ही संबंधित अधिकारी को भेजें। बिना नाम के पोस्टल ऑर्डर का गलत इस्तेमाल होने की संभावना के साथ-साथ जन सूचना अधिकारी द्वारा उसे लौटाया भी जा सकता है। पोस्टल ऑर्डर आप किसी भी पोस्ट ऑफिस से खरीद सकते हैं।
ऐप्लिकेशन देने के बाद
- अगर आपने अपनी ऐप्लिकेशन जन सूचना अधिकारी (पीआईओ) को दी है तो वह आपको 30 दिन के अंदर सूचना मुहैया कराएगा। साथ ही उसके जवाब में प्रथम अपीलीय अधिकारी का नाम व पता भी दिया जाना जरूरी है। अगर आपने अपनी ऐप्लिकेशन सहायक सूचना अधिकारी को दी है तो उसकी समयसीमा 35 दिन है।
- ऐप्लिकेंट द्वारा मांगी गई सूचना का संबंध अगर किसी व्यक्ति की जिंदगी या आजादी से जुड़ा हो तो सूचना अधिकारी को ऐप्लिकेशन मिलने के 48 घंटों के अंदर इन्फर्मेशन देनी होगी।
- जन सूचना अधिकारी द्वारा दस्तावेज (अतिरिक्त) मुहैया कराए जाने के लिए फीस की रसीद जारी करने और आवेदक द्वारा उस फीस को जमा कराने की अवधि को उन 30 दिन की अवधि में नहीं जोड़ा जाता है।


ऐप्लिकेशन लेने से इनकार
कुछ विशेष परिस्थितियों में ही जन सूचना अधिकारी आपकी ऐप्लिकेशन लेने से इनकार कर सकता है। वे इस तरह हैं :
- अगर ऐप्लिकेशन किसी और जन सूचना अधिकारी या पब्लिक अथॉरिटी के नाम पर हो।
- अगर आप ठीक तरह से सही फीस का भुगतान न कर पाए हों।
- अगर आप गरीबी रेखा से नीचे के परिवार के सदस्य के रूप में फीस से छूट मांग रहे हैं, लेकिन इससे जुड़ा सर्टिफिकेट नहीं दे सकते।
ऐसा भी होता है
- अगर आपकी अपील पर संबंधित अधिकारी को सूचना आयोग द्वारा आर्थिक रूप से दंडित किया जाता है तो जुर्माने के रूप में उससे ली गई राशि सरकारी खजाने में जमा की जाती है। हालांकि धारा 19(8) (बी) के अंतर्गत आवेदक को किसी हानि या नुकसान के लिए मुआवजा दिया जा सकता है।
- कुछ अधिकारी ऐप्लिकेंट को मीटिंग के लिए बुलाते हैं, यह कानून पब्लिक अथॉरिटीज को मीटिंग के लिए आवेदकों को बुलाने या यहां तक कि आवेदक को व्यक्तिगत रूप से आकर मांगी गई सूचना ले जाने पर जोर देने का अधिकार नहीं देता है।
- अगर आपको ऐसा लगता है कि आपके द्वारा सूचना मांगे जाने से आपके जान-माल को खतरा हो सकता है तो आप सूचना दूसरे व्यक्ति के नाम पर मांग सकते हैं। जिसे आसानी से धमकाया नहीं जा सके या जो किसी दूर स्थान पर रहता हो।
- जहां मांगी जा रही सूचना एक से अधिक व्यक्ति को प्रभावित करती हो, तो कभी-कभी अन्य लोगों के साथ मिलकर संयुक्त रूप से सूचना मांगना बेहतर होता है, क्योंकि अधिक संख्या आपको बल और सुरक्षा देती है।
- अगर ऐप्लिकेंट पढ़ा-लिखा नहीं है तो जन सूचना अधिकारी की यह जिम्मेदारी है कि वह उसकी रिक्वेस्ट को लिखित रूप में देने में सभी प्रकार से सहायता करें।
- अगर ऐप्लिकेशन की विषयवस्तु किसी और पब्लिक अथॉरिटी से जुड़ी हो तो उस ऐप्लिकेशन को संबंधित पब्लिक अथॉरिटी को ट्रांसफर किया जाना चाहिए।
- अगर कोई आवेदक ऐसी सूचना मांगता है जो किसी तीसरी पार्टी से संबंध रखती है अथवा उसके द्वारा उपलब्ध कराई जाती है और तीसरी पार्टी ने ऐसी सूचना को गोपनीय माना है तो जन सूचना अधिकारी की जिम्मेदारी है कि वह सूचना को प्रकट करने अथवा न करने पर विचार करें।
- थर्ड पार्टी में ऐसी प्राइवेट कंपनियां आती हैं, जो सरकार से मदद नहीं लेती हैं और जो सूचना के अधिकार कानून के दायरे में नहीं आती। ऐसी कंपनियों की जानकारी केवल सरकारी माध्यम से मांगी जा सकती है। लेकिन ये कंपनियां जानकारी देने के लिए बाध्य नहीं हैं।


अपील का अधिकार
- अगर किसी ऐप्लिकेंट को तय समयसीमा में सूचना उपलब्ध नहीं कराई जाती है या वह दी गई सूचना से संतुष्ट नहीं होता है तो वह प्रथम अपीलीय अधिकारी के सामने अपील कर सकता है।
- प्रथम अपील के लिए कोई फीस नहीं देनी होगी। अपनी ऐप्लिकेशन के साथ जन सूचना अधिकारी के जवाब और अपनी पहली ऐप्लिकेशन के साथ-साथ दूसरे जरूरी दस्तावेज अटैच करना जरूरी है।
- प्रथम अपीलीय अधिकारी रैंक में जन सूचना अधिकारी से बड़ा अधिकारी होता है। ऐसी अपील सूचना उपलब्ध कराए जाने की समयसीमा के खत्म होने या जन सूचना अधिकारी का फैसला मिलने की तारीख से 30 दिन के अंदर की जा सकती है।
- अपीलीय अधिकारी को अपील मिलने के 30 दिन के अंदर या विशेष मामलों में 45 दिन के अंदर अपील का निपटान करना जरूरी है।
दूसरी अपील एसआईसी में
अगर आपको पहली अपील दाखिल करने के 45 दिन के अंदर जवाब नहीं मिलता या आप उस जवाब से संतुष्ट नहीं हैं तो आप 45 दिन की अवधि समाप्त होते ही 90 दिन के अंदर राज्य सरकार की पब्लिक अथॉरिटी के लिए उस राज्य के स्टेट इन्फर्मेशन कमिशन से या केंद्रीय प्राधिकरण के लिए सेंट्रल इन्फर्मेशन कमिशन के पास दूसरी अपील दाखिल कर सकते हैं। दिल्ली के लोग दूसरी अपील सेंट्रल इन्फर्मेशन कमिशन में ही कर सकते हैं।
- नोएडा, गाजियाबाद सहित यूपी के लोग दूसरी अपील स्टेट इन्फर्मेशन कमिशन में कर सकते हैं। इनका पता है :
चीफ इन्फर्मेशन कमिश्नर, स्टेट इन्फर्मेशन कमिशन, छठी मंजिल, इंदिरा भवन, लखनऊ, यूपी- 226001, फोन - 0522-2288598/ 2288599
वेबसाइट : http://upsic.up.nic.in/
- हरियाणा के लिए सेकंड अपीलीय अधिकारी स्टेट इन्फर्मेशन कमिशन है। इनका पता है :
चीफ इन्फर्मेशन कमिश्नर, स्टेट इन्फर्मेशन कमिशन, हरियाणा, एससीओ नं.- 70-71, सेक्टर - 8सी, चंडीगढ़, फोन - 0172-2726568
वेबसाइट : http://cicharyana.gov.in/

 
अगर फिर भी न हों संतुष्ट
- अगर प्रथम अपीलीय अधिकारी इस तय समयसीमा में कोई आदेश जारी नहीं करता या ऐप्लिकेंट प्रथम अपीलीय अधिकारी के आदेश से संतुष्ट नहीं होता तो वह फैसला आने के 90 दिन के अंदर केंद्रीय सूचना आयोग के सामने सेकंड अपील दायर कर सकता है।
- अगर आरटीआई को जन सूचना अधिकारी रिजेक्ट कर देता है, तो ऐप्लिकेंट को वह कुछ सूचनाएं जरूर देगा। ये हैं : रिजेक्शन की वजह, उस टाइम पीरियड की जानकारी जिसमें रिजेक्शन के खिलाफ अपील दायर की जा सके और उस अधिकारी का नाम व पता (ब्यौरा) जिसके यहां इस फैसले के खिलाफ अपील की जा सकती है।
- सूचना का अधिकार ऐक्ट के तहत अपील पर फैसला करना एक अर्द्ध-न्यायिक काम है। इसलिए अपीलीय अधिकारी के लिए यह सुनिश्चित कराना जरूरी है कि सिर्फ न्याय हो ही नहीं, बल्कि वह होते हुए दिखाई भी दे। इसके लिए अपीलीय अधिकारी द्वारा पारित आदेश स्पीकिंग ऑर्डर होना चाहिए, जिसमें फैसले के पक्ष में तर्क भी दिए गए हों।


एक्स्ट्रा फीस
सूचना लेने के लिए आरटीआई ऐक्ट में ऐप्लिकेशन फीस के साथ एक्स्ट्रा फीस का प्रावधान भी है, जो इस तरह है :
- फोटो कॉपी किए गए हर पेज के लिए 2 रुपये।
- बड़े आकार के कागज में कॉपी की लागत कीमत।
- नमूनों या मॉडलों के लिए उसकी लागत या कीमत।
- अगर दस्तावेज देखने हैं तो पहले घंटे के लिए कोई फीस नहीं है। इसके बाद हर घंटे के लिए फीस 5 रुपये है।
- डिस्क या फ्लॉपी में सूचना लेनी है तो हर डिस्क या फ्लॉपी के लिए 50 रुपये।
जा सकते हैं केंद्रीय सूचना आयोग
आप सीधे केंद्रीय सूचना आयोग में शिकायत कर सकते हैं अगर
- आप संबंधित पब्लिक अथॉरिटी में जन सूचना अधिकारी न होने की वजह से आरटीआई नहीं डाल सकते
- केंद्रीय सहायक लोक सूचना अधिकारी आपकी ऐप्लिकेशन को संबंधित केंद्रीय लोक (जन) सूचना अधिकारी या अपीलीय अधिकारी को भेजने से मना करता है
- सूचना के अधिकार एक्ट के तहत सूचना पाने की आपकी रिक्वेस्ट को ठुकरा दिया जाता है
- अधिनियम में तय समयसीमा के भीतर आपकी ऐप्लिकेशन का कोई जवाब नहीं दिया जाता है
- फीस के रूप में एक ऐसी राशि की मांग की जाती है जिसे आप उचित नहीं मानते
- लगता है कि अधूरी और बरगलाने वाली झूठी सूचना दी गई है
होगी कार्रवाई
अगर किसी शिकायत या अपील पर फैसला देते समय केंद्रीय सूचना आयोग का यह मत होता है कि केंद्रीय सूचना अधिकारी ने बिना किसी ठीक वजह के ऐप्लिकेशन को जमा करने में कोताही बरती या तय समय के भीतर सूचना नहीं दी या गलत भावना से ऐप्लिकेशन को रिजेक्ट किया या जान-बूझकर गलत व गुमराह करने वाली सूचना दी अथवा उस सूचना को नष्ट किया जिसे मांगा गया था तो आयोग उस सूचना अधिकारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश कर सकता है। इसके अलावा राज्य अथवा केंद्रीय सूचना आयोग को अधिकार है कि वह उस अधिकारी पर 250 रुपये रोजाना या अधिकतम 25,000 रुपये तक का जुर्माना भी कर सकता है।


केंद्रीय सूचना आयोग को अपील करते समय यह जानकारी दी जानी जरूरी है :
- अपील करने वाले का नाम और पता
- उस अधिकारी का नाम और पता जिसके फैसले के खिलाफ अपील की गई है
- उस आदेश की संख्या जिसके खिलाफ अपील की गई है (अगर कोई हो)
- अपील करने की वजह और उससे जुड़े फैक्ट
- मांगी गई राहत
- साथ ही उन आदेशों या दस्तावेजों की सेल्फ अटेस्टेड कॉपियां भी होनी चाहिए जिसके खिलाफ अपील की गई है और उन दस्तावेजों की कॉपी भी जिनके बारे में उसने अपील में ब्यौरा दिया है


यहां नहीं लागू होता कानून
किसी भी खुफिया एजेंसी की ऐसी जानकारियां, जिनके सार्वजनिक होने से देश की सुरक्षा और अखंडता को खतरा हो, को इस कानून के दायरे से बाहर रखा गया है। निजी संस्थानों को भी इस दायरे से बाहर रखा गया है, लेकिन इन संस्थाओं की सरकार के पास उपलब्ध जानकारी को संबंधित सरकारी विभाग से प्राप्त किया जा सकता है। खुफिया एजेंसियों द्वारा मानवाधिकार उल्लंघन होने और इन संस्थाओं में भ्रष्टाचार के मामलों की जानकारी ली जा सकती है। अन्य देशों के साथ भारत के संबंध से जुड़े मामलों की जानकारी को भी इस कानून के दायरे से बाहर रखा गया है।


आरटीआई ऐप्लिकेशन का सैंपल
शिकायत पर हुई कार्रवाई की स्थिति पता करने के लिए सूचना के अधिकार कानून के आवेदन का सैंपल -
सेवा में,
जन सूचना अधिकारी
परिवहन विभाग
5/9, अंडर हिल रोड
दिल्ली
विषय : सूचना का अधिकार कानून, 2005 के तहत आवेदन
महोदय,
मैंने पिछले महीने की 5 तारीख (5.2.2010) को कमिश्नर के नाम पर एक खत भेजा था (प्रति संलग्न है), लेकिन उस पर अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। कृपया इस बारे में मुझे नीचे पूछी गई जानकारियां उपलब्ध कराएं
1. विभाग को प्राप्त होने वाली शिकायतों पर कार्रवाई के लिए क्या मापदंड तय किए गए हैं?
2. फरवरी 2010 में आपके विभाग में कितनी शिकायतें आईं और उनमें से कितनी शिकायतों पर कार्रवाई हो चुकी है और कितनी अभी पेंडिंग हैं?
3. मेरी शिकायत पर अभी तक हुई दैनिक प्रगति क्या रही और उन्होंने इस अवधि में उस पर क्या कार्रवाई की?
4. कृपया उन अधिकारियों के नाम और पद की जानकारी उपलब्ध कराएं (अगर कोई है), जिन्होंने शिकायत को लंबित रखा।
5. कार्रवाई को लंबित रखने के लिए इन अधिकारियों पर क्या कार्रवाई होगी?
6. यह कार्रवाई कब की जाएगी?
7. मेरी शिकायत पर कब तक कार्रवाई हो पाएगी?
8. क्या विभाग मुझे इसकी सूचना देगा?
मैं आवेदन शुल्क के रूप में 10 रुपये का पोस्टल ऑर्डर / मनी ऑर्डर (जो भी संलग्न करना हो) संलग्न कर रहा हूं। कृपया सूचना का अधिकार ऐक्ट के अनुसार मुझे समय पर सूचना उपलब्ध कराई जाए।
आपका विश्वासी / आवेदक / भवदीय
राजकुमार चौहान
गली नं. 10, करीम नगर (निकट बिल्लू हलवाई)


इन साइटों से लें पूरी जानकारी
सूचना के अधिकार कानून से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी और दूसरी सूचनाएं पाने के लिए इन वेबसाइटों पर जरूर जाएं।
http://www.rti.gov.in/
http://www.cic.gov.in/

अगर आप सूचना के अधिकार कानून की पूरी जानकारी या इसकी कॉपी चाहते हैं तो यह हिंदी व अंग्रेजी में कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की वेबसाइट http://www.persmin.nic.in/ और www.righttoinformation.info पर भी उपलब्ध है।


रिऐलिटी चेक
राइट टु इन्फर्मेशन एक्ट को लेकर अधिकारियों का नजरिया नहीं बदला है। आमतौर पर डिपार्टमेंट ऐप्लिकेंट को कोई जानकारी ही नहीं देना चाहते। देखने में आया है कि ऐप्लिकेशन मिलने के बाद डिपार्टमेंट उस ऐप्लिकेंट के बारे में पूछताछ करते हैं। उस पर ब्लैकमेल करने का आरोप लगाते हैं। यह काम उन्हें बोझ लगता है। जबकि होना यह चाहिए वे इन ऐप्लिकेशनों का स्वागत करें। एक बार जवाब देने पर उनका डेटा अपडेट हो जाता है और भविष्य में सभी सूचनाएं देना उनके लिए आसान हो जाता है। सूचना के अधिकार से नागरिक मजबूत हुआ है, मगर अधिकारियों के नजरिए में बदलाव आना जरूरी है।
एक्सपर्ट की राय
आरटीआई एक्सपर्ट एडवोकेट पीयूष जैन के अनुसार, इस ऐक्ट से आम नागरिक अपने अधिकारों को लेकर जागरूक हुआ है। ऐसे में दिल्ली का अपना राज्य आयोग न होने से सेंट्रल इन्फर्मेशन कमिशन पर दबाव बढ़ता जा रहा है। सरकार को चाहिए कि वह अपने जन शिकायत सिस्टम को जवाबदेह बनाएं और शिकायतों के निपटाने के लिए एक समयसीमा तय करें। जैन के मुताबिक, हैरानी की बात है कि सरकार की भागीदारी में काम कर रही बिजली कंपनियां आरटीआई के दायरे से बाहर हैं। सूचना के नाम पर ऐप्लिकेंट को आधी-अधूरी जानकारी दिए जाने पर डिपार्टमेंट खुद अधिकारियों की जवाबदेही सुनिश्चित करें।


आरटीआई का जादू, एक मिसाल
लेखक के घर के पास सड़क में बिजली की तारें बिछाई गईं। छह महीने तक सड़क की मरम्मत नहीं हुई। थक हारकर उन्होंने दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) के पब्लिक इन्फर्मेशन ऑफिसर से 'सूचना का अधिकार' ऐक्ट 2005 के तहत जानकारी मांगी। मगर उन्हें जो सूचना मिली, वह असलियत के बिल्कुल उलट थी। इसलिए उन्होंने निगम के डिप्टी कमिश्नर को पहली अपील की। डिप्टी कमिश्नर द्वारा उन्हें सुनवाई के लिए बार-बार बुलाया गया, मगर वे अफसर हमेशा नदारद मिले। दो महीने के इंतजार के बाद जब उन्हें प्रथम अपीलीय अधिकारी से कोई जवाब नहीं मिला तो उन्होंने तमाम दस्तावेज के साथ केंद्रीय सूचना आयुक्त (सेंट्रल इन्फर्मेशन कमिश्नर) को दूसरी अपील की। तय समय और तारीख पर इन्फर्मेशन कमिश्नर शैलेश गांधी के सामने दोनों पक्ष पेश हुए। तमाम डॉक्युमेंट देखने पर इन्फर्मेशन कमिश्नर ने नगर निगम के असिस्टेंट इंजीनियर को 15 दिन में लेखक द्वारा दर्शाई गई सड़कों की मरम्मत और मलबा हटाने का आदेश दिया। साथ ही एमसीडी के डिप्टी कमिश्नर को काम की उपेक्षा करने का दोषी मानते हुए अगले 20 दिनों में अपना पक्ष रखने के लिए कहा। यह आरटीआई का ही जादू है कि जो सड़क छह महीने से खुदी पड़ी थी, वह 10 दिनों में चकाचक तैयार हो गई।

Sunday, March 21, 2010

प्रेम की भाषा

काशी के एक संत अपने आश्रम में शिष्य पारंगत के साथ रहते थे। उसने आश्रम में बीस साल रह कर ढे़र सारा ज्ञान अर्जित किया। roads एक दिन संत ने कहा, 'वत्स पारंगत, तुमने बहुत समय तक मेरी सेवा की है। इस अवधि में मेरे पास भी जो कुछ न था, वह सब मैंने तुम्हें सिखला दिया है। तुम और ज्ञान अर्जित करो इसलिए मैंने फैसला किया है कि तुम कुछ समय के लिए देशाटन जाओ। देश के तीर्थ स्थलों का भ्रमण करो और देश की अधिकाधिक भाषाएं सीख कर वापस आओ।'
पारंगत देशाटन पर निकल पड़ा। कई वर्ष बीत गए उसे भ्रमण करते हुए। इस अवधि में उसने विभिन्न प्रदेशों का भ्रमण किया। देश की सभी भाषाएं भी सीखी और कुछ घन भी एकत्रित करके एक दिन आश्रम लौट आया। उसने सोचा कि गुरु जी को जब पता चलेगा कि उनका शिष्य आश्रम के लिए घन में कमा कर लाया है तो बहुत खुश होंगे। वह आश्रम में गुरु जी के पास गया। गुरु जी रुग्णावस्था में तख्त पर लेटे थे। गुरु को इस हालत में देश कर उसे एक बार दुख तो हुआ लेकिन उत्साह में उसने गुरु को प्रणाम करके कहा, 'गुरुवर, मैं देश की सभी भाषाएं सीख ली है और आश्रम में लिए धन कमा का भी लाया हूं।'
संत शांत भाव से उसकी बातें सुनते रहे फिर बोले, 'वत्स, क्या तुम्हें कभी कोई ऐसा व्यक्ति भी मिला जो बेवश, लाचार होकर भी दूसरों की मदद कर रहा हो। क्या तुम्हें कोई ऐसी मां मिली, जो अपने शिशु को भूखा रोता देख कर अपना दूध रहित स्तन उसे पिला रही हो।' पारंगत ने कहा, 'ऐसे लोग तो हर जगह मिले थे।' गुरु ने कहा, 'क्या तुम्हारे मन में उनके लिए किसी तरह की सहानुभूति जगी थी। क्या तुमने प्रेम का एकाध शब्द उनसे कहे।' उसने कहा, 'गुरुवर, मैं इस झमेले में पड़ता तो आप के आदेश का पालन कैसे करता। मेरे पास इतनी फुर्सत नहीं थी कि मैं इस ओर ध्यान देता।'
संत ने कहा, 'वत्स पारंगत, तुमने बहुत सारी भाषाएं तो सीख ली, धन भी कमाया लेकिन उस अमूल्य भाषा को नहीं सीख पाए जिसके लिए मैंने तुम्हें भेजा था। तुम अब भी प्रेम, करुणा और सहानुभूति की भाषा से वंचित हो। यदि ऐसा नहीं होता तो तुम दुखियों का दुख देख कर भी अनदेखा नहीं करते। यहां तक कि तुमने अपने गुरु को भी रुग्णावस्था में देख कर भी कुशल क्षेम जाने बिना अपनी कहानी सुनाने लगे।' पारंगत गुरु का भाव समझ गया और अज्ञानता के लिए क्षमा मांग कर उलटे पांव लौट कर अज्ञात दिशा की तरफ चला गया।

Friday, March 19, 2010

सबसे सुंदर

एक व्यक्ति जिज्ञासु प्रवृत्ति का था। एक बार उसके मन में सवाल उठा कि सर्वोत्तम सौंदर्य क्या है? वह इसके उत्तर की खोज में चल पड़ा। th_photography
उसने एक तपस्वी के सामने अपनी जिज्ञासा रखी। तपस्वी बोले, 'श्रद्धा ही सबसे सुंदर है, जो मिट्टी को भी ईश्वर में परिवर्तित कर देती है।' वह व्यक्ति इस जवाब से संतुष्ट नहीं हुआ और आगे बढ़ गया। आगे उसे एक प्रेमी मिला जिसने कहा, 'इस दुनिया में सबसे सवोर्त्तम सौंदर्य सिर्फ प्रेम है। प्रेम के बल पर इंसान दुनिया की बड़ी से बड़ी ताकत को पराजित कर सकता है।' व्यक्ति को इससे भी संतुष्टि नहीं हुई।
उस समय एक योद्धा रक्तरंजित, हताश लौट रहा था। उस व्यक्ति ने योद्धा से वह प्रश्न पूछा तो योद्धा बोला, 'शांति ही सबसे सर्वोत्तम है, क्योंकि युद्ध की विनाश लीला मैं स्वयं देखकर आ रहा हूं। मैंने देखा कि किस कदर ईर्ष्या और लोभ के वशीभूत लड़ा गया युद्ध अनेक जिंदगियां बरबाद कर देता है, कई घर उजाड़ देता है।' तभी एक स्त्री विलाप करती नजर आई। उस व्यक्ति ने उस स्त्री से इसका कारण जानना चाहा तो वह बोली, 'मेरी बेटी खेलते-खेलते जाने कहां चली गई है। मैं उसे ढूंढ रही हूं।' तभी स्त्री की पुत्री खेलते-खेलते उसके पास पहुंच गई। स्त्री ने उसे बांहों में भर लिया।
युवक ने उससे भी वही प्रश्न किया। स्त्री बोली, 'मेरी नजर में तो ममता में ही सर्वोत्तम सौंदर्य छिपा हुआ है।' स्त्री की बातों से उस व्यक्ति को अपने घर की याद आ गई। उसे अहसास हुआ कि पिछले कई दिनों से वह अपने घर से बाहर है। वह घर के लिए चल पड़ा। घर पहुंचने पर उसकी पत्नी और उसके बच्चे उससे लिपट गए। उन्हें देखकर उसे असीम शांति की प्राप्ति हुई। उसे लगा उसका परिवार ही सर्वोत्तम सौंदर्य है। लेकिन फिर उसने सोचा कि वास्तव में सर्वोत्तम सौंदर्य के प्रत्येक व्यक्ति के लिए अलग-अलग अर्थ हैं और जिसके पास उनमें से जो अर्थ मौजूद है उसकी नजरों में वही सबसे महत्वपूर्ण है।

Tuesday, March 16, 2010

लक्ष्य की तलाश

बहुत पुरानी कथा है। एक राजा अपने राजसी दायित्वों से ऊब istock_photo_of_two_bike_riders गए थे। वह जो भी करते, बेमन से करते। वह चाहते थे

कि किसी तरह राजपाट त्याग दें और ईश्वर का साक्षात्कार करें। एक दिन उन्होंने राजसिंहासन अपने उत्तराधिकारी को सौंपा और  राजमहल छोड़कर जंगल की ओर चल पड़े। उन्होंने रास्ते में कई विद्वानों के साथ सत्संग किया, कुछ दिनों तक तपस्या की किंतु उनके भीतर अतृप्ति बनी रही। मन में खिन्नता का भाव लिए वह तीर्थयात्रा पर निकल पड़े। एक दिन चलते-चलते वह काफी थक गए और भूख के कारण निढाल से होने लगे। वह पगडंडी से उतर एक खेत में रुके और एक पेड़ के नीचे बैठ सुस्ताने लगे। उन्हें देख एक किसान उनके पास जा पहुंचा। वह उनका चेहरा देखकर ही समझ गया वह थके होने के साथ भूखे भी हैं।
किसान ने हांडी में उबालने के लिए चावल डाले। चावल की हांडी को आग पर चढ़ाकर उसने राजा से कहा, 'उठो, यह चावल पकाओ, जब चावल पक जाएं तब मुझे आवाज दे देना। हम दोनों इससे पेट भर लेंगे।' राजा मंत्रमुग्ध होकर किसान की बात सुनते रहे। किसान के वहां से जाने के बाद उन्होंने चावल पकाने शुरू कर दिए। जब चावल पक गए, तो उन्होंने किसान को बुलाया और दोनों ने भरपेट चावल खाए। भोजन करने के बाद किसान काम में लग गया और राजा को ठंडी छांव में गहरी नींद आ गई। उन्होंने स्वप्न में देखा कि एक दिव्य पुरुष खड़ा होकर कह रहा है, 'मै कर्म हूं और मेरा आश्रय पाए बगैर किसी को शांति नहीं मिलती। राजन, तुम भी पुरुषार्थ करो और अपना लक्ष्य प्राप्त करो।' नींद खुलने पर राजा ने सपने पर विचार किया तब उन्हें कर्म में प्रवृत्त होने की प्रेरणा मिली। वह वापस अपने राज्य लौट गए। उन्होंने जनकल्याण को अपना लक्ष्य बना लिया और उसी में रम गए। इससे उन्हें आत्मिक शांति मिली। उन्हें लगा कि यही वह लक्ष्य था जिसे वह अब तक ढूंढ रहे थे।

Chest exercise

Bench Press

Description:
- Lie on bench press bench.
- Grasp barbell bar or dumbbells, hands shoulder distance or slightly more apart.
- Lift weight off of support.
- Lower weight to chest.
- Push weight up.
- Repeat and place bar back on support when finished.

*Note: This exercise can also be done with dumbbell weights.

Chest Press

Description:
- Sit at chest press machine.
- Grasp handles and push forward.
- Return to start position and repeat.

Decline Bench

Description:
- Lie on back on decline press bench.
- Grasp bar with firm grip, hands shoulder distance or slightly more apart.
- Push bar upward off of rest and lower to chest.
- Push bar back up and repeat.
- Replace bar on rest when finished.

 

Cable-Pull Decline

Description:
- Attach pulley to secure object above head level.
- Begin with arm up and out from side as shown.
- Grasp handle, palm forward and pull down and across.
- End with hand at opposite hip, palm inward.
- Return to start position and repeat.

Dips

Description:
- Place hands on dip bars, elbows bent.
- Push down, raising body upward.
- Lower and repeat.

Dumbbell Flies

Description:
- Lie on back on flat bench or incline bench.
- Hold weights in hands, palms up, elbows slightly bent as shown.
- Lift arms up and inward while straightening elbows.
- Lower and repeat.

*Note: This exercise can also be done on an incline bench to work the upper chest.

Dumbbell Pullover

Description:
- Lay on back holding weight straight overhead.
- Keep elbows straight.
- Lower weight until it almost touches floor and return to start position.

Incline Bench

Description:
- Sit on incline bench.
- Hold dumbbells or barbell in hands, arms out to sides, elbows bent.
- Lift arms up and overhead as shown.
- Lower and repeat.

*Note: This exercise can also be done with dumbbell weights.

Diagonal Pull-Down

Description:
- Grab pulley, aligned at shoulder level.
- Grasp in hand.
- Pull arm inward, keeping elbow straight.
- Return to start position and repeat

Pec Deck

Description:
- Sit in pectoral machine.
- Place inside of arms against pads, elbows bent to 90 degrees.
- Pull arms inward and together.
- Return to start position and repeat.

Straight Arm Pull-Down

Description:
- Grasp Lat bar in hands.
- Bend knees slightly, keep arms straight.
- Start with bar at eye level.
- Pull bar down to thighs, keeping elbows straight.
- Return to start position and repeat.

 

Lateral Dumbbell-Flies

Description:
- Stand with arms out to sides, elbows straight.
- Hold weights in hands.
- Lift arms up to middle, keeping elbows straight.
- Return to start position and repeat.

Monday, March 15, 2010

असली धन

एक सेठ के यहां कई नौकर काम करते थे। उनमें शंभु नामक एक रसोइया भी था। fruit-bite वह सेठ जी के परिवार और सभी नौकरों

का भोजन एक साथ बनाता था। एक दिन सेठ जी जब खाना खाने लगे तो उन्हें सब्जी मीठी लगी। वह समझ गए कि शंभु ने भूल से सब्जी में नमक की जगह चीनी डाल दी है। मगर सेठ जी ने उसके सामने बड़े चाव से सारी सब्जी खाई। शंभू को कुछ पता नहीं चला। खाने के बाद सेठ जी ने शंभु से कहा, 'शायद तुम परेशान हो। क्या बात है?'
शंभू ने कहा, 'पत्नी कई दिनों से बीमार है। यहां से जाने के बाद उसकी देखभाल करने में ही सारी रात बीत जाती है।' सेठ ने उसे कुछ पैसे देते हुए कहा, 'तुम अभी घर चले जाओ और पत्नी जब पूरी तरह स्वस्थ हो जाए तभी आना। और पैसे की जरूरत पड़े तो आकर ले जाना।' शंभु चला गया। उसके जाने के बाद सेठानी ने कहा, 'आप ने उसे जाने क्यों दिया। अभी तो और लोगों ने खाना तक नहीं खाया है। सारा काम पड़ा है।' सेठ जी बोले, 'उसके मन में अपने से ज्यादा हमारी चिंता है तभी उसने एक दिन छुट्टी नहीं की। आज उसने सब्जी में नमक की जगह चीनी डाल दी है। मैं उसके सामने सब्जी खा गया ताकि उसे कुछ पता न चले।
है तो बहुत छोटी बात, लेकिन यदि यह सब्जी दूसरे नौकर खाएंगे तो शंभु के आने पर सब उसका मजाक उड़ाएंगे। वह लज्जित होगा। इसलिए तुम इसे जानवरों को खिला दो और दूसरी सब्जी बना कर सभी को खिलाओ।' पत्नी बोली, 'आप भी कमाल करते हैं। हमारे पास संपत्ति है, सम्मान है फिर भी नौकरों को लेकर इतनी चिंता क्यों?' सेठ जी ने कहा, 'आज हमारे पास जो कुछ भी है, वह इन्हीं लोगों की मेहनत और ईमानदारी का फल है। मैंने अभी तक जो रिश्ते कमाए हैं उन्हें खोना नहीं चाहता। असली धन तो यही है।'

Arm Muscles

 

Upper Arm
Biceps
Triceps

Forearm
Extensors
Flexors

User's Manual
Arm Exercises
Tricep Exercises
Bicep Exercises
Forearm Exercises
Arm Stretches
Upper Arm Stretches
Wrist & Forearm Stretches

Amazing Facts


Upper Arm

Biceps
The most commonly flexed arm muscle for impressive purposes. A pair of muscles in each arm, used for underhand pull-ups, tug-of-war contests, and any other action requiring the arms to bend while pulling.

Triceps
A pair of muscles in each arm used to straighten the arms in order to push an object.

Forearm

Extensors
A group of muscles in the forearm used to extend the wrist.

Flexors
A group of muscles of the forearm used to flex the wrist.

Arms User Manual
Triceps Exercises
Tricep Extensions

Main target: the triceps (back of the upper arms).

  • Stand a foot or two back from the pulley, to avoid rubbing the cord on your face.
  • Feet shoulder width apart.
  • Grab bar or tricep rope attached to an overhead pulley.
  • Start with elbows bent at right angles.
  • Keep elbows close to the body at all times.
  • Keep your shoulders down.
  • Push the bar or pull the rope down.
  • Feel it in the back of your upper arms.
  • Return to starting position under control.
  • Repeat.

Lying Tricep Extensions
Main target: triceps

  • Grab an EZ curl bar with overhand grip and lie on a bench.
  • Hold the bar with straight arms directly over your head.
  • Keep elbows stationary while slowly lowering the bar just beyond your forehead.
  • Pause.
  • Raise the bar to the starting position.
  • Repeat.

This can also be done with a bar attached to a low pulley.

French Press
Main target: the triceps.

  • Stand or sit erect.
  • Grab a barbell with both hands two hands width apart, or grab a single-handed barbell with both hands.
  • Raise the weight above your head.
  • Keep your elbows close to the side of your head.
  • Lower the weight behind your neck until the elbows are bent at a 90û.
  • Raise the weight above the head and repeat.


Dumbbell Kick-backs or Leaning Tricep Extensions
Main Target: triceps.

  • Grab a dumbbell with your right hand.
  • Stand with your left leg forward and right leg back.
  • Lean forward bracing yourself with your left arm, pressing your left hand against your left knee.
  • Keep your right elbow firmly pressed against and in line with your right side.
  • Start with your right forearm hanging straight down from your elbow.
  • Straighten your right arm rotating your forearm in a backward ark.
  • Once your arm is straight hold briefly and slowly lower your forearm back to the starting position.
  • Pay strict attention to proper technique. You probably need to start with less weight than you expect, in order to retain correct form.
  • Repeat.
  • When finished, switch arms and legs and repeat the exercise.


Dips
Main Target: triceps, lower chest, shoulders.

  • Grab the parallel dip bars
  • Lift yourself so arms are fully extended
  • Slowly lower your body by bending your elbows until your upper arms are parallel to the floor.
  • Pause.
  • Lift yourself to the starting position.


Biceps Exercises

Two Hand Bicep Curls
Main target: the biceps (front of the upper arms/ the pythons!)

Always support the bar or dumbbells with your shoulders between reps.

Always keep your elbows at least slightly bent to avoid over extension.

  • Stand erect retaining good back posture, with head facing forward and shoulders square.
  • Rest bar against front thighs.
  • Lift bar to the front of your shoulders.
  • Lower the bar in control.

Do not tilt back or forward during the exercise. Keeping the body completely still, while only the lower arms move will give the biceps the best workout.

Never use your back to whip the bar up Ð this does you absolutely no good and can cause injury.

Important note: When you use free weights for curling you don't do much work at the beginning and end of the motion. The point at which your elbows are bent at 90û requires the most effort. To get resistance at every point during the motion use a bar attached to a floor pulley on a universal machine or any other various bicep curl machine available at the gym. This goes for the reverse curl as well.

 


Preacher Bicep Curls
Main target: the biceps

Always keep your elbows at least slightly bent to avoid over extension.

  • Sit on the preacher bench seat with your elbows resting on the front of the pad and your back straight, bending forward at the hips.
  • Hold EZ curl bar with underhand shoulder width grip.
  • Lift bar toward your chin.
  • Pause.
  • Lower the bar under control.


Incline Curl
Main target: biceps isolated.

  • Sit back on an incline bench.
  • Take a dumbbell in each hand.
  • Let arms hang.
  • Curl each arm alone alternating arms.

Do not swing the dumbbells once they are lowered.


Concentration Curl
Main target: biceps isolated.

  • Sit on a bench.
  • Bend forward, holding a dumbbell in your right hand with your right elbow resting on the inside of your right thigh.
  • Curl the dumbbell to your shoulder.
  • Repeat.
  • Switch hands and repeat the exercise.


Reverse Curl
Main target: upper and outer forearms, brachialis and biceps.

This is a weak position for your biceps so start with little weight and use caution.

  • Stand with feet shoulder width apart.
  • Take a shoulder width over-hand grip of a barbell resting the bar on the upper thighs.
  • With your elbows close to your rib cage, curl the bar to your chin.
  • Lower the bar in control to your upper thighs.
  • Repeat.

 

Forearms Exercises

Each exercise uses 5 to 6 sets of 15 to 20 reps or more.

Thick handled dumbbells give you a greater range of motion. You can thicken a narrow bar by rapping padding and grip tape around it.


Wrist Curl (4 sets of many)
Main Target: the flexors (belly of the forearms).

  • Grab a barbell with an underhand grip.
  • Sit on a bench.
  • Rest your forearms on your thighs with palms facing up.
  • Hands holding the bar hanging in front of your knees.
  • Curl the weight into the palm of your hand flexing only at the wrist.
  • Lower the bar to hang in front of the knees.
  • Don't allow the bar to roll down the fingers. Keep a firm grip.
  • As mentioned, a thicker bar will give you greater range of motion.
  • Repeat.

 


Reverse Wrist Curl (4 sets of many)
Main Target: the extensors (top of the forearms).

  • Grab a barbell with an overhand grip.
  • Sit on a bench.
  • Rest the belly of your forearms on your thighs with palms facing down.
  • Hands holding the bar hanging in front of your knees.
  • Flex the wrist as far as possible lifting the bar.
  • Lower the bar to hang in front of the knees.
  • Repeat.


Wrist Roller
Main Target: forearms.

  • Grab a thick handle bar with both hands using an overhand grip.
  • You can sit with your forearms resting on your thighs or stand holding the bar in front of you.
  • Roll the bar with both hands.
  • Tension can be supplied by attaching a weight to the bar using a cord, which wraps around the bar as you roll it, or some machines offer a tension dial to set before performing the exercise.
  • Roll your wrists in as large a motion as possible.
  • Avoid moving your elbows to isolate the exercise to the forearms.


Gripping
Main Target: Forearm flexors (belly of the forearms).

Any exercise requiring a strong grip such as pull-ups or bent over rowing can help develop your forearms.

There are also specific apparatus made to grip against resistance:

Bruce Lee designed a gripping machine consisting of a fixed upper bar, and a moveable lower bar attached to weight. By pulling the lower bar up to the fixed bar using the fingers, he received a great gripping workout. Lee developed his forearms immensely to increase his forearm mass and thus the force of his punches (force = mass * velocity) and to increase the strength of his wrists.

Portable gripping tools are also available and can be conveniently used at any time throughout the day. One such tool consists of two small rods separated with tension supplied by a spring. The user grips the two rods, forcing the two rods together using his thumb and fingers against tension.


Zottman Curls
Main Target: entire forearm.

  • Grab a dumbbell in each hand.
  • Stand erect with feet shoulder width apart and dumbbells hanging at your sides.
  • Always keep your upper arms fixed to your sides.
  • Curl the right dumbbell in an ark toward your left side and ending at your right shoulder with palms facing up.
  • Rotate your right hand so your palms are facing down and lower the dumbbell in an ark to the right.
  • As you lower the right dumbbell, begin the same exercise with the left arm by raising the left dumbbell.
  • Repeat in alternate fashion one arm after the other in smooth circular movements.


Wrist Twists
Main Target: entire forearm.

  • Grab a dumbbell in each hand.
  • Stand erect arms bent at 90û, holding your upper arms against your sides and your forearms extending in front of you, palms facing each other.
  • Rotate the dumbbells back and forth in opposing directions.


Thor's Hammer
Main Target: entire forearm.

  • Grab Thor's hammer (a small bar with a weight attached securely to the end) with your right hand.
  • Stand with back straight. Hold right elbow stationary close to your side while you rotate the bar from a palm-up position to a palm-down position and back again.
  • Once finished, switch hands and repeat.


Upper Arm Stretches


Tricep Stretch

  • Stand straight.
  • Grab your right elbow with your left hand.
  • Raise your left elbow straight up into the air and gently pull it backward so your right hand slides down your spine.
  • Make sure your spine is straight and torso erect.
  • Feel the stretch on the underside of your upper right arm.
  • Repeat with the left arm.

 


Arm Circles

  • Stand erect, feet shoulder-width apart, knees slightly bent.
  • Straighten one of your arms.
  • Make as large a circle as you can make with this arm in one direction several times and then in the other direction several times.
  • Keep your back straight.
  • Repeat with the other arm.
  • Feel your chest, shoulders and side loosening up.


Biceps Stretch

You might be able to stretch your biceps just by fully straightening your arms And extending the top of your hand with bent fingers toward the top of your forearms Now rotate your arms so they extend behind you and hold.


If you need more of a stretch resume this position and ask a friend to gently and slowly raise your arms higher behind you.


Or if a friend isn't available try the following:

  • Stand one arm's length from a pole facing away from the pole.
  • Keep your back erect, feet shoulder-width apart and knees slightly bent.
  • Extend your right arm to the side with your palm facing backward.
  • Reach back and wrap your right fingers around the pole propping up your hand with your right thumb.
  • Keeping your right arm slightly bent at all times, slowly and gently rotate your right shoulder forward and down.
  • Feel the stretch across your chest and in the biceps.
  • Repeat with other arm.

 


Wrist and Forearm Stretches
Very important before handling heavy weights

Hand Rotations

  • Rotate and bend your hands as far as you can in every direction you can think.
  • Your wrists should loosen up a bit.

 


Wrist Flicks
Once you have loosened up your wrists with wrist rotations and wrist stretches, try this exercise to prepare your wrist for tension.

  • Hold your hands up and toward the center of your chest with palms facing you.
  • Briskly shake your hands down and out.
  • Return to starting position.

 


Wrist Extension Stretch

  • Extend your right arm in front of you, elbow slightly bent, and hand opened face up.
  • Place your left fingers together, face down, on top of your right fingers.
  • Extend your right arm straight while pressing your right fingers down with your left hand.
  • Hold.
  • Feel it in the belly of your right forearm.
  • Switch hands and repeat.

 


Wrist Flex Stretch

  • Position your right hand palm facing down in front of you, extending across your chest.
  • Raise your right elbow so your right arm is parallel to the floor.
  • Grab the top of your right hand just distal to the wrist with your left hand.
  • Use your left hand to flex the relaxed right hand toward the right elbow while gently lifting the right wrist upward.
  • Feel it in the top of the wrist and forearm.
  • Repeat with the other hand.


Inward Wrist Twist

  • Position your right hand face up in front of you just below your chest.
  • Grab the underside of your relaxed right hand with your left hand by wrapping your fingers around the thumb-side base and pressing your left thumb against the right hand just below the first pinky knuckle Ð much easier to explain visually.
  • Gently pull at the right thumb-side base while pushing at the right hand near the pinky knuckle.
  • This should twist your wrist to its limit.
  • Feel the pull in the extensors and wrist.
  • Hold.
  • Repeat with the other hand.

 


Outward Wrist Twist
Another doozy to explain Ð see diagram.

  • Extend your arms in front of you.
  • Place your hands back to back like spoons, palms facing to your left.
  • Lock the right fingers between the bases of the left fingers.
  • Slowly and gently use the right hand to pull the relaxed left hand toward the center of your chest upper.
  • Feel the pull in your wrist.
  • Hold.
  • Repeat with the other hand.

Shake out your wrists after each exercise.

  • You have all the muscle fibers you will ever have at birth. Once damaged they can't be replaced.
  • Arnold Shwarzenaeger has just about as many muscle fibers as you do. They're just thicker.
  • There are more than 600 voluntary muscles in the body.
  • Your hand contains 20 different muscles.
  • If all your muscles could pull in one direction you could create a force of 25 tons.
  • Muscles account of 40% of your body weight.

Saturday, March 13, 2010

Interview Questions and Answers

Tell me about yourself.

The most often asked question in interviews. You need to have a short statement prepared in your mind. Be careful that it does not sound rehearsed. Limit it to work-related items unless instructed otherwise. Talk about things you have done and jobs you have held that relate to the position you are interviewing for. Start with the item farthest back and work up to the present.

Do you consider yourself successful?
You should always answer yes and briefly explain why. A good explanation is that you have set goals, and you have met some and are on tract to achieve the others.
Why did you leave your last job?
Stay positive regardless of the circumstances. Never refer to a major problem with management and never speak ill of supervisors, co-workers, or the organization. If you do, you will be the one looking bad. Keep smiling and talk about leaving for a positive reason such as an opportunity, a chance to do something special, or other forward-looking reasons.
Prepare Interview

What experience do you have in this field?

Speak about specifics that relate to the position you are applying for. If you do not have specific experience, get as close as you can.

What do you know about this organization?

This question is one reason to do some research on the organization before the interview. Find out where they have been, and where they are going. What are the current issues, and who are the major players?

What have you done to improve your knowledge in the last year?

Try to include improvement activities that relate to the job. A wide variety of activities can be mentioned as positive self-improvement. Have some good ones handy to mention.

Are you applying for other jobs?

Be honest but do not spend a lot of time in this area. Keep the focus on this job and what you can do for this organization. Anything else is a distraction.

What do co-workers say about you?

Be prepared with a quote or two from co-workers. Either a specific statement or a paraphrase will work. "Jill Clark, a co-worker at Smith Company, always said I was the hardest worker she had ever known." It is as powerful as Jill having said it at the interview herself.

Why do you want to work for this organization?

This may take some thought and certainly should be based on the research you have done on the organization, Sincerity is extremely important here, and will easily be sensed. Relate it to your long-term career goals.

Do you know anyone who works for us?

Be aware of the policy on relatives working for the organization. This can affect your answer even though they asked about friends not relatives. Be careful to mention a friend only if they are will thought of.

What kind of salary do you need?

A loaded question. A nasty little game that you will probably lose if you answer first. So, do not answer it. Instead, say something like, "That's a tough question. Can you tell me the range for this position?" In most cases, the interviewer, taken off guard, will tell you. If not, say that it can depend on the details of the job. Then give a wide range.

Are you a team player?

You are, of course, a team player, Be sure to have examples ready. Specifics that show you often perform for the good of the team rather than for yourself are good evidence of your team attitude. Do not brag, just say it in a matter-of-fact tone. This is a key point.

How long would you expect to work for us if hired?

Specifics here are not good. Something like this should work: "I'd like it to be a long time." Or "As long as we both feel I'm doing a good job."

Have you ever had to fire anyone? How did you feel about that?

This is serious. Do not make light of it or in any way seem like you like to fire people. At the same time, you will do it when it is the right thing to do. When it comes to the organization versus the individual who has created a harmful situation, you will protect the organization. Remember firing is not the same as layoff or reduction in force.

What is your philosophy towards work?

The interviewer is not looking for a long or flowery dissertation here. Do you have strong feelings that the job gets done? Yes. That's the type of answer that works best here. Short and positive, showing a benefit to the organization.

If you had enough money to retire right now, would you?

Answer yes if you would, But since you need to work, this is the type of work you prefer. Do not say yes if you do not mean it.

Have you ever been asked to leave a position?

If you have not, say no. If you have, be honest, brief, and avoid saying negative things about the people or organization involved.

Explain how you would be an asset to this organization.

You should be anxious for this question. It gives you a chance to highlight your best points as they relate to the position being discussed. Give a little advance thought to this relationship.

Why should we hire your?

Point out how your assets meet what the organization needs. Do not mention any other candidates to make a comparison.

Tell me about a suggestion you have made.

Have a good one ready. Be sure and use a suggestion that was accepted and was then considered successful. One related to the type of work applied for is a real plus.

What irritates you about co-workers?

This a trap question. Think "real hard" but fail to come up with anything that irritates you. A short statement that you seem to get along with folks is great.

What are your greatest weaknesses?

Assure the interviewer that you can think of nothing that would stand in the way of your performing in this position with excellence. Then, quickly review you strongest qualifications.

Example: "Nobody's perfect, but based on what you've told me about this position, I believe I' d make an outstanding match. I know that when I hire people, I look for two things most of all. Do they have the qualifications to do the job well, and the motivation to do it well? Everything in my background shows I have both the qualifications and a strong desire to achieve excellence in whatever I take on. So I can say in all honesty that I see nothing that would cause you even a small concern about my ability or my strong desire to perform this job with excellence."

Alternate strategy (if you don't yet know enough about the position to talk about such a perfect fit): Instead of confessing a weakness, describe what you like most and like least, making sure that what you like most matches up with the most important qualification for success in the position, and what you like least is not essential.

Example: Let's say you're applying for a teaching position. "If given a choice, I like to spend as much time as possible in front of my prospects selling, as opposed to shuffling paperwork back at the office. Of course, I long ago learned the importance of filing paperwork properly, and I do it conscientiously. But what I really love to do is sell (if your interviewer were a sales manager, this should be music to his ears.)

What is your greatest strength?

Numerous answers are good, just stay positive. A few good examples: your ability to prioritize.

You know that your key strategy is to first uncover your interviewer's greatest wants and needs before you answer questions.
Prior to any interview, you should have a list mentally prepared of your greatest strengths. You should also have, a specific example or two, which illustrates each strength, an example chosen from your most recent and most impressive achievements.
As a general guideline, the 10 most desirable traits that all employers love to see in their employees are:

· Your problem-solving skills.

· Your ability to work under pressure.

· Your ability to focus on projects.

· Your professional expertise.

· Your leadership skills.

· Your positive attitude.

· Tell me about your dream job.

· Definiteness of purpose...clear goals.

· Enthusiasm...high level of motivation.

· Likeability...positive attitude...sense of humor.

Stay away from a specific job. You cannot win. If you say the job you are contending for is it, you strain credibility. If you say another job is it, you plant the suspicion that you will be dissatisfied with this position if hired. The best bet is to stay generic and say something like: "A job where I love the work, like the people, can contribute, and can't wait to get to work."

Why do you think you would do well at this job?

Give several reasons and include skills, experience, and interest.

What are you looking for in a job?

Stay away from a specific job. You cannot win. If you say the job you are contending for is it, you strain credibility. If you say another job is it, you plant the suspicion that you will be dissatisfied with this position if hired. The best bet is to stay generic and say something like: "A job where I love the work, like the people, can contribute, and can't wait to get to work."

What kind of person would you refuse to work with?

Do not be trivial, It would take disloyalty to the organization, violence or lawbreaking to get you to object. Minor objections will label you as a whiner.

What is more important to you: the money or the work?

Money is always important, but the work is the most important. There is not better answer.

What would your previous supervisor say your strongest point is?

· Loyalty
· Energy
· Positive attitude
· Leadership
· Team Player
· Expertise
· Initiative
· Patience
· Hard Work
· Creativity
· Problem solver
· Tell me about a problem you had with a supervisor.

Biggest trap of all. This is a test to see if you will speak ill of your boss. If you fall for it and tell about a problem with a former boss, you may well blow the interview right there. Stay positive and develop a poor memory about any trouble with a superior.

What has disappointed you about a job?

Don't get trivial or negative. Safe areas are few but can include.

  • Not enough of a challenge.
  • You were laid off in a reduction.
  • Company did not win a contract, which would have given you more responsibility.

    Tell me about your ability to work under pressure.

    You may say that you thrive under certain types of pressure. Give an example that relates to the type of position applied for.

    Do your skills match this job or another job more closely?

    Probably this one. Do not give fuel to the suspicion that you may want another job more than this one.

    What motivates you to do your best on the job?

    This is a personal trait that only you can say, but good examples are:

  • Challenge
  • Achievement
  • Recognition

    How would you know you were successful on this job?

    Several ways are good measures:

    Ø You Set high standards for yourself and meet them.

    Ø Your outcomes are a success.

    Ø Your boss tells you that you are successful.

    Would you be willing to relocate if required?

    You should be clear on this with your family prior to the interview if you think there is a chance it may come up. Do not say yes just to get the job if the real answer is no. This can create a lot of problems later on in your career. Be honest at this point and save yourself future grief.

    Describe your management style.

    Try to avoid labels. Some of the more common labels, like "progressive", "Salesman" or "Consensus", can have several meanings or descriptions depending on which management expert you listen to. The "situational" style is safe, because it says you will manage according to the situation, instead of "one size fits all."

    Do you have any blind spots?

    Trick question, if you know about blind spots, they are no longer blind spots. Do not reveal any personal areas of concern here. Let them do their own discovery on your bad points. Do not hand it to them.

    How do you propose to compensate for your lack of experience?

    First, if you have experience that the interviewer does not know about, bring that up. Then, point out (if true) that you are a hard working quick learner.

    What qualities do you look for in a boss?

    Be generic and positive, safe qualities are knowledgeable, a sense of humor, fair, loyal to subordinates, and holder of high standards. All bosses think they have these traits.

    Describe a bad decision you made.

    The major pitfall that interviewee's often exhibit with this question is that they make the "bad decision" something they did when they were ten years old. The idea here is not to avoid the question. Pick something from the relevant past. We all make mistakes and a hallmark of honesty is admitting that and a hallmark of self-awareness is being able to recognize when we made those mistakes.
    Do not put your mistake so far back in the past that you are obviously picking something that is "harmless" but if you feel the need to do this, you might say something like, "Well, I have more current answers but I have one from my past that really stuck with me." If you go that route, then explain why that decision "stuck with you" and, more importantly, how it is has guided your actions in other areas so as to not make that kind of bad decision again. The real point here, for the candidate, is to turn this into a "lesson learned" answer. State your bad decision, make it clear why you perceive this was a bad decision, and then talk about what you learned from that.

    Describe your work ethic.

    Emphasize benefits to the organization. Things like, "determination to get the job done" and "work hard but enjoy your work" are good.

    Do you have any questions for me?

    Always have some questions prepared. Questions involving areas where you will be an asset to the organization are good. "How soon will I be able to be productive?" and "What type of projects will I be able to assist on?" are examples.

  • JAVA Common Interview Questions and Answers

    What is the difference between procedural and object-oriented programs?-

    a) In procedural program, programming logic follows certain procedures and the instructions are executed one after another. In OOP program, unit of program is object, which is nothing but combination of data and code.

    b) In procedural program, data is exposed to the whole program whereas in OOPs program, it is accessible with in the object and which in turn assures the security of the code.

    What is the difference between Assignment and Initialization?-

    Assignment can be done as many times as desired whereas initialization can be done only once.

    What is the difference between constructor and method?

    - Constructor will be automatically invoked when an object is created whereas method has to be called explicitly.

    What is the difference between an argument and a parameter?

    - While defining method, variables passed in the method are called parameters. While using those methods, values passed to those variables are called arguments.

    What is the difference between overloading and overriding?

    - a) In overloading, there is a relationship between methods available in the same class whereas in overriding, there is relationship between a superclass method and subclass method.

    b) Overloading does not block inheritance from the superclass whereas overriding blocks inheritance from the superclass.

    c) In overloading, separate methods share the same name whereas in overriding, subclass method replaces the superclass.

    d) Overloading must have different method signatures whereas overriding must have same signature.

    What is the difference between this() and super()?

    - this() can be used to invoke a constructor of the same class whereas

    - super() can be used to invoke a super class constructor.

    What is the difference between superclass and subclass?

    - A super class is a class that is inherited whereas sub class is a class that does the inheriting.

    What is the difference between String and String Buffer?

    - a) String objects are constants and immutable whereas StringBuffer objects are not.

    b) String class supports constant strings whereas StringBuffer class supports growable and modifiable strings.

    What is the difference between Array and vector?-

    Array is a set of related data type and static whereas vector is a growable array of objects and dynamic.

    What is the difference between exception and error?-

    The exception class defines mild error conditions that your program encounters. Exceptions can occur when trying to open the file, which does not exist, the network connection is disrupted, operands being manipulated are out of prescribed ranges, the class file you are interested in loading is missing. The error class defines serious error conditions that you should not attempt to recover from. In most cases it is advisable to let the program terminate when such an error is encountered.

    What is the difference between process and thread?-

    Process is a program in execution whereas thread is a separate path of execution in a program.

    What is the difference between abstract class and interface?-

    a) All the methods declared inside an interface are abstract whereas abstract class must have at least one abstract method and others may be concrete or abstract.

    b) In abstract class, key word abstract must be used for the methods whereas interface we need not use that keyword for the methods.

    c) Abstract class must have subclasses whereas interface can’t have subclasses.

    What is the difference between Integer and int?- a) Integer is a class defined in the java. lang package, whereas int is a primitive data type defined in the Java language itself. Java does not automatically convert from one to the other.

    b) Integer can be used as an argument for a method that requires an object, whereas int can be used for calculations.

    What is the difference between choice and list?- A Choice is displayed in a compact form that requires you to pull it down to see the list of available choices and only one item may be selected from a choice. A List may be displayed in such a way that several list items are visible and it supports the selection of one or more list items.

    What is the difference between scrollbar and scrollpane?-

    A Scrollbar is a Component, but not a Container whereas Scrollpane is a Conatiner and handles its own events and perform its own scrolling.

    What is the difference between applications and applets?-

    a)Application must be run on local machine whereas applet needs no explicit installation on local machine. b)Application must be run explicitly within a java-compatible virtual machine whereas applet loads and runs itself automatically in a java-enabled browser.

    c)Application starts execution with its main method whereas applet starts execution with its init method. d)Application can run with or without graphical user interface whereas applet must run within a graphical user interface.

    What is the difference between set and list?-

    Set stores elements in an unordered way but does not contain duplicate elements, whereas list stores elements in an ordered way but may contain duplicate elements.

    What is the difference between an applet and a servlet?-

    a) Servlets are to servers what applets are to browsers.

    b) Applets must have graphical user interfaces whereas servlets have no graphical user interfaces.

    What is the difference between doPost and doGet methods?-

    a) doGet() method is used to get information, while doPost() method is used for posting information.

    b) doGet() requests can’t send large amount of information and is limited to 240-255 characters. However, doPost()requests passes all of its data, of unlimited length.

    c) A doGet() request is appended to the request URL in a query string and this allows the exchange is visible to the client, whereas a doPost() request passes directly over the socket connection as part of its HTTP request body and the exchange are invisible to the client.

    What is the difference between TCP/IP and UDP?-

    TCP/IP is a two-way communication between the client and the server and it is a reliable and there is a confirmation regarding reaching the message to the destination. It is like a phone call. UDP is a one-way communication only between the client and the server and it is not a reliable and there is no confirmation regarding reaching the message to the destination. It is like a postal mail.

    Friday, March 12, 2010

    Etiquettes of gymming

    Don't let your gym work against you. Watch out for these common pitfalls, suggests fitness expert Althea Shah.

    Gymming
    Like everything else, a workout also has its own set of etiquettes and rules which, if not followed, can send your regimen for a toss. Being able to drag yourself every day to the gym is good, but even more important is to have the correct know-how of the dos and don'ts while exercising. Althea Shah, fitness expert from Gold’s Gym India, Mumbai, lists the common dangers prevalent in the gym.
    Out of form: All exercises are designed in a specific manner to provide optimal results. It’s common knowledge that lifting maximum weight (as per one’s capacity) during the last set of any exercise provides maximum benefit. It helps one attain ‘muscle fatigue’ which gives the ‘after-burn’ effect (calorie burn after finishing the workout). However, the worst thing that one can do is to compromise on the right ‘form’ so as to be able to lift that ‘extra’ weight.
    Without the best form, workload goes waste or becomes unproductive. Those who swing weights while lifting and bend their backs during a bicep curl are at a high risk of injuries.
    Lifting too much: Never lift more than what your muscles can handle. Gradual, progressive resistance is a far more effective way to increase muscle strength. When helping somebody with his workout, align your body such that it allows you to aid the lifter, without any risk of injury.
    Keep it clean: Always wipe the equipment with a gym towel before and after use as it helps prevent spread of diseases. Though there’s a lot of etiquette emphasis on wiping equipment (such as the cardio machines) after use, it is also imperative to take your health in your own hands and wipe it before use as germs could still be transferred from adjacent machines.
    Don’t go barefoot: The human traffic in locker rooms, combined with absence of sunlight, creates a perfect environment for germs to flourish. Always wear footwear to avoid athlete’s foot, a fungus infection that usually starts with itchy scales and blisters between the toes. Footwear will also keep you from slipping on wet tiles.
    Those frequenting jacuzzis and pools are at high risk of catching contagious skin infections such as dermatitis. Chlorine in the water kills most germs, but if it doesn’t contain enough chlorine, you could catch a hair-follicle infection which needs antibiotic treatment.
    Junk the mobile: Gym is for working out. So do just that. Smsing and chatting on phone not only wastes time, but the smart ones who try to multi-task their workouts with cell phone activity are at high risk of injuries. Treadmill accidents account for more than one-third of the reported injuries, with people either tripping or falling off them. Learn to use the machine first and refrain from checking your cell phone while working out. Also, be careful not to go too close to someone lifting heavy weights. He/she might, by mistake, drop them on your feet.
    Fit to size: The gym equipment is designed to accommodate a wide range of body types and sizes, so it’s imperative that you adjust it to your size. Not doing so reduces the machine’s impact on your muscle. The muscle, hence, goes partially trained, leading to sluggish contribution in muscular growth.
    Don’t jerk: When you jerk the weight, it’s likely that you’re jerking other muscle groups as well. This can lead to strain and injury. The back muscles are particularly vulnerable to such injuries. Remember: control the weight, don’t let it control you.
    Right equipment: Before using any equipment, check that there are no loose nuts or screws on the machine. If the machine rattles or works with a jerk during exercise, stop immediately. Also, check cables of weight machines to ensure they aren’t frayed or damaged, and are covered with a protection sleeve.

    Fun ways to keep fit

    'Fitness at workplace’ is the latest mantra in the corporate world. Companies have realised that regular exercise boosts employee morale, enhances productivity, reduces absenteeism and signs of burnout or depression. Office work
    Nowadays, the corporate employees not only stretch themselves beyond their responsibilities, but also stretch their muscles in the office gym.
    A little bit of planning and a few small additions in one’s office routine can help one a healthier lifestyle. According to a World Health Organisation report, India could incur losses to the tune of $237 billion by 2015 due to rise in lifestyle diseases like heart disease, diabetes, stroke and cancer, because of unhealthy workplaces.
    Here are some easy everyday things you can do to get healthy and fit while at your workplace:
    Stay hydrated: Water helps your body with physical and mental performance, detoxification and digestion. Keep a water bottle at your desk and you’ll find it much easier to drink the recommend eight glasses of water each day. It will ease stress and result in sustained energy throughout the day. You can also supplement it with fresh lemonade and coconut water, etc, to avoid monotony.
    Make reasons to walk around: Give yourself several reasons to take a break and move around after every 40 minutes. Simply getting up and moving around for a few moments can keep you focused, less fatigued and feeling better. For example, avoid ordering a cup of coffee/ tea at your desk, go and get it yourself or while speaking with someone on cell phone walk around till you end the call. Get down from your car if driven by a chauffer a few blocks before your office and walk the remaining distance provided you leave home 10 to 15 minutes before your usual time.
    Hit the office gym in lunch hours: Try to exercise for 30 minutes during the lunch time and grab a bite at your desk afterwards. Encourage having an area of a simple gym in your office. It could be jogger or a stationary bicycle or a treadmill.
    Simple stretching: People often face stress, back and joint pains and weight gain problems at work. To get rid of such health problems, while sitting in your chair, flex your feet and circle your ankles, stretch your legs and arms as frequent as you can.
    Take the stairs: Whenever possible, get moving and take the stairs rather than the elevator. Taking stairs will keep you fit and energetic.
    Pack healthy snacks: Rather than buying chips, junk food and sodas during office hours, bring some granola, fruit or raw veggies to snack on. This healthy diet will keep your energy levels fit and steady.
    Conduct meetings on the go: When it's practical, schedule walking meetings or brainstorming sessions. Do laps inside your building or take your walking meetings outdoors.
    Participate in different office games: Office games such as table tennis, basket ball are an interesting way to keep healthy and fit. These games not only keep your energy levels high but also keep your body in good shape.